गुरु पूर्णिमा विशेष मानव जीवन का उद्देश्य – केवल मोक्ष
आज मुझे एक बात समझ में नहीं आती कि लोग जीवन भर पुरस्कार (Award), सम्मान, पद और प्रसिद्धि पाने की दौड़ में क्यों लगे रहते हैं?
यदि आपकी नौकरी स्थिर है, परिवार चल रहा है और जीवन की आवश्यकताएँ पूरी हो रही हैं, तो फिर एक परीक्षा के बाद दूसरी परीक्षा, एक डिग्री के बाद दूसरी डिग्री और एक पुरस्कार के बाद दूसरा पुरस्कार क्यों?
क्या आपने कभी स्वयं से पूछा है – “मैं इस धरती पर क्यों आया हूँ?”
यदि इस प्रश्न का उत्तर नहीं मिला, तो जीवन की सबसे बड़ी शिक्षा अभी बाकी है।
पुरस्कार, पद, धन, प्रतिष्ठा और नाम – सब इसी संसार में रह जाएंगे। आपके साथ केवल आपकी आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth), आपके संस्कार और आपके कर्म ही जाएंगे।
इसलिए अपने जीवन को भीतर से उन्नत बनाइए। ऐसे गुरु की खोज कीजिए जो आपको आत्मा, कर्म और मोक्ष का मार्ग समझा सके। यदि अभी तक गुरु नहीं मिले हैं, तो सच्चे मन से प्रार्थना कीजिए। जब शिष्य तैयार होता है, तब गुरु अवश्य मिलते हैं।
अपने जीवन से जुड़े हर अच्छे रिश्ते के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें(Gretitude)। जिन रिश्तों में कटुता है, उन्हें पिछले कर्मों का परिणाम समझें। उन्हें क्षमा, प्रेम, प्रार्थना और आंतरिक भाव से समाप्त करें। पुराने कर्मों का हिसाब बंद करें और आगे बढ़ें। नए कर्म ऐसे न करें कि फिर उसी बंधन को सुलझाने के लिए पुनर्जन्म लेना पड़े।
सीमाएँ (Boundaries) बनाना सीखें। सभी को खुश करने के प्रयास में स्वयं को मत खोइए।
इतना कमाइए कि परिवार का जीवन सम्मानपूर्वक चले। लेकिन पूरी जिंदगी केवल धन और विलासिता के पीछे मत दौड़िए। आप इस धरती पर केवल कमाने के लिए नहीं आए हैं।
प्रतिदिन कुछ समय केवल अपने लिए निकालिए। यदि आप हमेशा कहते रहते हैं कि “मैं बहुत व्यस्त हूँ”, तो इसका अर्थ है कि आपने स्वयं के लिए समय निकालना अभी सीखा ही नहीं।
जो व्यक्ति समय का सही उपयोग करना जानता है, वही वास्तव में स्वतंत्र होता है।
सप्ताह में एक दिन मौन रहें। कुछ समय अकेले बिताएँ। केवल फलाहार करें। इससे शरीर शुद्ध होगा, मन शांत होगा और आत्मा की आवाज़ अधिक स्पष्ट सुनाई देगी।
भीड़ से अधिक समय स्वयं के साथ बिताइए। कम बोलिए, अधिक सुनिए। प्रकृति के साथ जुड़िए। अपनी ऊर्जा को व्यर्थ की बातों में नष्ट मत कीजिए।
29 जुलाई – गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि जीवन की दिशा बदलने का अवसर है।
यदि आपके जीवन में गुरु नहीं हैं, तो ऐसे सद्गुरु की खोज करें जो आपको जीवन का उद्देश्य समझाएँ। गुरु केवल ज्ञान नहीं देते, वे आपके कर्मों का लेखा-जोखा समझाते हैं।
जैसे एक कुशल चार्टर्ड अकाउंटेंट किसी कंपनी की बैलेंस शीट सही बनाकर उसे सम्मानपूर्वक पूर्ण करता है, वैसे ही सद्गुरु आपके जीवन की कर्म-बैलेंस शीट को संतुलित करके आपको मोक्ष की दिशा दिखाते हैं।
याद रखिए—
मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य धन, प्रसिद्धि या पुरस्कार नहीं, बल्कि मोक्ष है।
आज स्वयं से पूछिए—
मैंने अपने धन के लिए कितना समय दिया?
बहुत दिया।
अपने परिवार के लिए कितना समय दिया?
बहुत दिया।
लेकिन अपनी आत्मा और मोक्ष के लिए कितना समय दिया?
यदि इसका उत्तर नहीं है, तो अभी से शुरुआत कीजिए।
इसी जन्म में अपने कर्मों का हिसाब पूर्ण करने का प्रयास करें। अन्यथा जन्म और मृत्यु का यह चक्र चलता रहेगा।
गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ।
– आचार्य सुनील सोनी
संस्थापक, SSS गुरुकुल